Thursday, September 20, 2012

आत्मशक्ति

कभी लगता है , टूट के बिखर जाऊंगी 
माला के मनको की तरह , जो गले का हार नहीं बन पाते 
उन पत्तों की तरह जो तेज़ हवा के झोकों से ..
टूट कर हैं गिर जाते ..
बारिश की नन्ही बूंदों की तरह ..
जो फुहार बन हैं रह जाती ..
नदी की छोटी.... धारा की तरह ...
जो सागर से हैं मिलना चाहती ...
लेकिन तभी मन के एक कोमल हिस्से से ..एक मज़बूत आवाज़ है आती..
कभी धीमे तो कभी होकर तेज़ ..फिज़ाओं में है खो जाती 
वो आवाज़ प्रतीक है ..उन इच्छाओं का ..........
जो पूरी न होने के डर से हो गयी है शांत ..
वो आवाज़ देती है हिम्मत ..गिर कर उठ जाने का ...
और कहती है तुझे करना है सपनों को साकार ....
उस आवाज़ की बात मानने को जी चाहता है ..
अपने अस्तित्व की लडाई लड़ने को जी चाहता है 
आँखों में सजाएं उन सपनों के पीछे भागने को जी चाहता है ...
क्योंकि ये आवाज़ कहती है ..की खुली आँखों से देखे सपने ..
अक्सर सच हो जाते हैं ..
क्योंकि उन सपनों को हकीकत बनाने ..हम हर गम भूल जुट जाते हैं ...



Monday, July 30, 2012

विश्वासघात


कॉलेज में परीक्षा परिणाम घोषित हो चूका था ! रिया की तो जैसे पैरों तले जमीन ही खिसक गयी थी ! वह दिव्तीय श्रेणी में पास हुई थी ! सब हैरान थे की पिछले साल की टॉपर और इस वर्ष इतने कम अंक , कारण कोई भी समझ नहीं पा रहा था ! रिया भागती हुई अपने हॉस्टेल के कमरे में आई और औंधे मुह बिस्तर में गिर कर रोने लगी ! उसी के हॉस्टेल की लड़की प्रीति जब उसका परीक्षा परिणाम पूछने आई तो नंबर सुन कर हैरान हो गयी ! वह बहुत ही समझदार व होशियार लड़की थी ! वह उसी कॉलेज से बी , अस , सी कर रही थी ! उसने रिया को प्यार से समझाया की वह दिल छोटा न करे , और अगली बार और मेहनत से पढाई करे ,ऐसे रोने और दिल छोटा करने से कुछ नहीं होगा ! लेकिन रिया बस रोये जा रही थी..और रोते-रोते एक ही बात बोल रही थी की यह सब मेरी ही गलती के कारण हुआ है ! प्रीति से जब रहा न गया तो वह पूछने लगी की तुमे हुआ क्या है ? मैं कई दिनों से देख रही हूँ ! तुम बहुत परेशान रहती हो ! प्रीति की ये बात सुनकर रिया कहने लगी की नहीं , ऐसी कोई बात नहीं है ...तुम्हें ऐसे ही वहम हुआ होगा ..और खुद को सँभालने लगी .. रिया प्रीति के पास बैठ गयी और प्यार से कहने लगी की मैं तुम्हारी सहेली हूँ , और तुम्हे अच्छी तरह से जानती हूँ ! प्रीति ने जब ज्यादा जोर दिया तो रिया उसके गले लग कर रोने लगी ! क्या कहू , एक इंसान रूपी शेतान ने मेरी जिन्दगी को नरक बना रखा है ! प्रीती गुस्से में पूछने लगी कौन है वो? मुझे पूरी बात बताओ ..घबराओ नहीं ..मैं तुम्हारे साथ हूँ ! उसकी ये बात सुनकर रिया थोड़ी शांत हुई और प्रीति से कहने लगी की तुम तो जानती हो की मुझे नेट चैटिंग का कितना शौंक है ! एक दिन में अपना अकाउंट चेक कर रही थी की एक लड़की की फ्रेंड रिक्वेस्ट आई ! उसका नाम , तस्वीर मुझे बहुत ही आकर्षक लगी और maine उसे एड कर लिया ! हम दोनों रोज बातें करते ! वह मेरे बारे में जो भी पूछती मैं सब सच बता देती अपना नाम , जगह , कॉलेज लेकिन वह सब झूट बताती रही ! जब हम दोनों की घनिष्टता बढ़ गयी तो उसने मुझे अपनी तस्वीर मेल करने को कहा ! मैं बेवकूफ उसके जाल में फस गयी , अपनी जिदगी व परिवार की सब सचाइयां बताती चली गयी ! एक दिन मुझे एक इ-मेल aaya जिसमे मेरी तस्वीरों को अश्लील बनाया हुआ था उसमें लिखा था जल्दी ही तुम्हे यह अपने कॉलेज की दीवारों पर दिखेगा ! प्रीती काफी हद तक sari बात समझ चुकी थी ! रिया साथ साथ रोये चली जा रही थी ! रात को जब स्मिता ऑन लायीं आई तो मैंने उससे तस्वीरों के बारे में पूछा , उसने कहा मुझे इसकी कोई जानकारी नहीं है ! और वह अपना अकाउंट बंद कर चली गयी ! मैं समझ गयी थी की मैंने गलत इंसान पर विश्वास कर लिया ! थोड़ी ही देर बाद एक मेल आया जिसमे लिखा था की कल ठीक ११ बजे अपने कॉलेज की छत पर आना तुम्हारे लिए एक सरप्राईज़ है ! वह आगे कहने लगी की पूरी रात में सो नहीं पाई और डरती रही की कल न जाने क्या होगा ! मैं पहले लेक्चर के बाद जब ऊपर गयी तो वंहा कोई नहीं था ! जब वापिस मुड़ी ही थी तो आवाज आई की कंहा चली , देखा तो हमारे ही कॉलेज का लड़का अजित वंहा खड़ा था ! मैं उसे देखकर स्तब्द रह गयी ! मुझे कुछ समझ नहीं आया ! अजित ने मुझे पूरी कहानी सुनानी शुरू की कैसे वो लड़की बनकर मुझसे बात करता रहा और उसका मुझे इस सोशल वेब-साईट पर तलाशना सब उसका बनाया गया प्लान था ! वह मुझे पहले भी तंग कर चूका है और इसके लिए मैंने उसे थप्पड़ मारा था इसी का बदला लेने के लिए उसने यह सारा खेल रचा है ! में कभी सोच भी नहीं सकती थी की वह इस हद तक गिर जायेगा ! अब वह मुझे उन तस्वीरों की धमिकया देता है की उन्हें कॉलेज में लगाएगा या पता नहीं .. ! जब मैंने उसका विरोध किया तो कहने लगा की या तो मुझे पैसे दो या मेरे साथ सोकर मेरी प्यास बुझा दो ! मैं फस गयी हूँ ! उसने मुझे कुछ दिन की मोहल्लत दी थी अब सिर्फ दो दिन शेष बचे हैं ! मैं क्या करू ना मेरे पास पैसे हैं , ना में ....!प्रीती कहने लगी तुम हिम्मत से काम लो , सब ठीक होगा ! हम मिलकर कोई रास्ते निकलते हैं ! वे दोनों शाम तक इस बात पर चर्चा करते रहे ! हाँ , मिल गया प्रीती ख़ुशी में कहने लगी , परसों तुम उसे खुद बुलाना ! हम कल जाकर प्रिंसिपल सर को सारी बात बतायेंगे और मुझे पूरा विश्वास है वे हमारी मदद जरुर करेंगे ! agle दिन वो सुबह ही प्रिंसिपल सर को मिलने गए , और उन तीनों ने मिलकर एक योजना तैयार की ! अगले दिन रिया नियत समय पर तैयार हो कॉलेज की छत पर जा पहुंची ! वंहा अजित पहले ही अपने दोस्तों के साथ खड़ा था ! उसे देख वह पूछने लगा की कंहा है पैसे, रिया कहने लगी वो तो में तुम्हे दे दूंगी ! पहले यह बताओ की इतना सब करके तुम्हे क्या मिला ! वह हँसते हुए कहने लगा की अब तुम मेरा बिगड़ भी क्या लोगी तो सुनो हमारा एक गिरोह इस तरह के कार्य करता है ! इनमें कुछ लोग इस कॉलेज के भी हैं , हम लड़कियों को ब्लेकमेल कर अपनी ऐश करते है !तुम्हारी फोटो भी हमने क्यों सॉफ्टवेर की सहायता से एडिट की है ! हा , तुम जैसी भोली लड़कियों के कारण हमारी जिन्दगी मौज-मस्ती से चल रही है ! वह जैसे ही उसे छूने के लिए आगे बड़ा पीछे से प्रिंसिपल सर की आवाज आई ! शाबाश तुम जैसे विद्यार्थियों ने ही तो कॉलेज का नाम रोशन करना है ! सर , वह आप जैसे मेरी कोई गलती नहीं है ! प्रिंसिपल सर डांटने लगे हाँ वो तो में सारी बातें सुन ही चूका हूँ ! तुम्हारी शिकायते पहली भी आई लेकिन कोई ठोस सबूत नहीं मिल रहा था ! अब तुम्हारी पूरी आवाज हमने रिकॉर्ड कर ली !वह जैसे ही भागने लगा , सुरक्षा -कर्मियों ने आकर उसे दबोच लिया ! इसे हम पुलिस के हवाले करेंगे व इसकी सारी डिग्रियां प्रतिबंधित हो जाएगी ! जिससे यह ना पढाई पूरी कर पायेगा ना ही कंही नौकरी कर पायेगा ! वह सर के पेरों में गिद -गिदाने लगा तभी रिया ने अमित के मुह पर एक जोरदार तमाचा मारा और कहने लगी की लड़की इतनी भी कमजोर नहीं है ! सुरक्षा कर्मियों ने उसके बाकि साथियों को भी पकड़ लिया ! सर कहने लगी की तुम्हारी हिम्मत से इस गिरोह का पर्दाफाश हुआ और ना जाने कितनी ही मासूम लड़कियों की जिंदगियां बच गयी ! सर शाबाशी दे कर  ऑफिस की तरफ चल दिए पर साथ ही हिदायत भी दे गए की आगे से इस प्रकार की गलती ना करना ! रिया हाँ सर कह विश्वास से डग भरती क्लास-रूम की और मूड गयी !


Friday, June 8, 2012

अनमोल तोहफा

विधालय का आखिरी पिरीअड चल रहा था ! सुनीता मैडम बच्चों को पढ़ाने के साथ ज्ञानवर्धक बातें भी सिखाती हैं ! इसलिए उनकी कक्षा में सभी बच्चे एकाग्रचित होकर सारी बातें सुनते ! वे बता रही थी की हमें कभी किसी का दिल नहीं दुखाना चाहिए ! गरीबों की सहायता करनी चाहिए! अचानक राजू हाथ ऊपर कर खड़ा हुआ ! सुनीता मेडम ने बहुत ही प्यार से कहा की बेटा कुछ पूछना है ! राजू कहने लगा की हमारे पास धन नहीं है तो हम किस तरह किसी जरूरतमंद की मदद कर सकते हैं ! मेडम कहने लगे मुझे ख़ुशी है की तुमने इतना सोचा ! बैठ जाओ राजू ! यह सवाल आमतौर पर सबके जेहन में था ! वे समझाने लगी की किसी नेत्रहीन या अपाहिज को सड़क पार करवाकर ....या फिर सबसे बड़ा धन देकर ..हम उनकी मदद कर सकते हैं ! सबसे बड़ा धन ! कौन सा मेडम लगभग सभी बच्चों ने मिलकर कहा ! विद्या धन अपनी पुरानी कापियों, किताबों , को व्यर्थ फाड़ कर या बेच कर हम उन्हें किसी को दान कर सकते हैं !इतने में छुट्टी की घंटी बजती है ! सब बच्चे मेडम को नमस्ते कहकर चले जाते हैं ! मिनी भी यही सब बातें सोच अपने घर रही होती है की रास्ते में उसे एक छोटी सी लड़की फूल बेचती नजर आती है ! मिनी उसके पास जाती है प्लीज़ मुझे दो फूल दे दो ! ये कितने सुंदर हैं ना ! लड़की हाँ में सर हिलती है ! अरे में तो पूछना ही भूल गयी इनकी कीमत क्या हैं ! लड़की दो रूपए मांग लेती है ! मिनी को लगता है वह लड़की कुछ दुखी है ! मिनी उसे पूछती है की तुम्हारा नाम क्या है ! तुम स्कूल नहीं जाती ! तुम्हारे घर पर कौन कौन है ! इतने सारे प्रशन सुनकर वह लड़की घबरा जाती है और रोने लगती है ! अरे चुप हो जाओ ! मैं कुछ नहीं बोलूंगी ! मिनी उसके पास ही बैठ जाती है ! दीदी मेरा नाम पूजा है ! मेरी माँ पहले फूल बेचने आया करती थी लेकिन पिछले कुछ समय से वे बीमार थी! इलाज हो पाने के कारण उनकी म्रत्यु हो गयी इसलिए अब में फूल बेचने आती हूँ! मिनी को उस पर बहुत दया आती है ! पूजा -माँ के जाने के बाद पहली बार मुझसे किसी ने ऐसे बात की इसलिए माँ की याद गयी ! मिनी उसे कल मिलने का वादा कर चली जाती है ! मिनी की मम्मी देर से आने का कारण पूछती है ! मिनी मम्मी को पूजा के बारे में सब बताती हैं ! मम्मीमिनी को कहती है की तुम चिंता मत करो हम उसकी यथासंभव सहायता करेंगे ! तुम खाना खाकर सो जाओ ! शाम को मम्मी मिनी को कहती है की तुम्हारे दोस्त तुमे खेलने के लिए बुला रहे हैं! नहीं मम्मी मेरा मन नहीं है मुझे नहीं खेलना ये कहकर मिनी मना कर देती है ! उसके दिमाग में कंही कंही पूजा का ही ख्याल रहता है !वह यही सोचती है की पूजा ने खाना खाया होगा या नहीं ! उसका तो कोई भी नहीं है! लेकिन वह चाहकर भी कुछ नहीं कर पाती ! अब मिनी ज्यादातर स्कूल से आते समय पूजा को मिलकर आती ,उसे खाने का सामान , पैसे इत्यादि दे देती! एक दिन जब मिनी वापिस रही होती है उसे पूजा नजर नहीं आती ! वह उसे आस-पास तलाशती है लेकिन पूजा का कुछ पता नहीं चलता ! वह घर आकर मम्मी को बताती है ! क्योंकि मिनी की पूजा से अच्छी दोस्ती थी और वह भी मिनी को दीदी मानती थी ! मिनी की मम्मी फिर उसे समझा कर खेलने भेज देती है ! मिनी की मम्मी उसके पापा को सब बताती है ! वे उसका उपाय निकलते हैं ! मिनी स्कूल जाकर अपने सहपाठियों सहेलियों को इस बात के बारें में बताती है ! वे सब कहते हैं की अगर हम अपनी पॉकेट मनी का कुछ हिस्सा भी बचाएँ तो पूजा की काफी मदद हो सकती हैं ..और अगर हम शाम को खेलने के समय में पूजा को थोड़ी देर पढ़ा भी सकते है ! सब इस बात के लिए राजी हो जाते हैं .. और छुट्टी होने के बाद पूजा से मिलने जाते ! परन्तु वंहा पर कोई नहीं होता ! नेहा- मिनी से पूछती है की पूजा कहाँ है ! चलो आस-पास देखते हैं या किसी से पूछते हैं ? अंकल यंहा आपने किसी फूल बेचने वाली लड़की को देखा ! नहीं बेटा वो लड़की तो - दिन से दिखाई नहीं दी ! राजी चलो यार चले - घर के लिए लेट हो रहे हैं ! शायद उसका कोई रिश्तेदार उसे साथ ले गया हो ! मिनी उदास हो जाती है और भारी मन से घर की और मूड जाती है ! नेहा -मिनी को समझती है की वो उदास हो , हम फिर पूजा को ढूँढने जायेंगे ! सभी इस बात के लिए राज़ी हो जाती है ...हाँ ठीक है चलो बाय -बाय ! मिनी घर पहुँचती है तो देखती है की घर में बहुत रौनक है और सब मिनी के जन्म -दिन की तैयारियों में लगे हुए हैं .. जो परसों था ! घर में सबको हँसता देख मिनी किसी को कुछ नहीं कहती ! उसके दादा-दादी नाना-नानी सब चुके थे ! मम्मी मिनी को कहती है की कल हम तुम्हारी खरीददारी करने चलेंगे और तुम्हें अपनी जिन सहेलियों को बुलाना है उनकी लिस्ट बना लो ! मिनी अपने माँ-बाप की एकलौती बेटी है ! हर साल उसका जन्मदिन बहुत ही धूमधाम से मनाया जाता सभी रिश्तेदार उनके घर आते ! अगली सुबह से तो मिनी भी बहुत व्यस्त थी बाजार जाना, सबको फ़ोन करना सारे कम करते -करते पूरा दिन निकल गया ! जन्मदिन की सुबह से ही वह एक परी की तरह चमक रही थी ! पहले दिन में पूजा शाम को पार्टी थी ! वह बहुत खुश थी पर उसे पूजा याद रही थी ! शाम को पार्टी के लिए उसने सुंदर सा लहंगा लिया था तैयार होकर वह बहुत प्यारी लग रही थी ! उसके सभी सहपाठी सहेलियां चुकी थी ! मिनी- मम्मी मेरा बर्थडे गिफ्ट कन्हा है ! मम्मी हसने लगी की पापा ला रहे हैं ! वह केक काटने लगी तो देखा की पापा पूजा को लेकर रहे हैं ! मिनी की समझ में कुछ नहीं आया ! अरे केक तो काटो बेटा सब बताती हूँ ! मिनी ने ख़ुशी से हाँ की और सबको केक खिलाया ! फिर पापा ने मिनी को गले लगाकर कहा पूजा आज से हमारे साथ रहेगी ! तुम्हारे साथ स्कूल में पड़ने जाएगी ! मिनी की ख़ुशी का ठिकाना रहा ! क्योंकि पूजा के रूप में उसे अपने जन्मदिन का अनमोल तोहफा मिल
गया था !
!