Thursday, November 5, 2009

सबक

राजू एक गरीब कुम्हार का लड़का था ! वह अपने चारों भाई - बहन में सबसे बडा था ! उसके पिता सारा दिन काम करने के बाद भी मुश्किल से ही तीन वक़्त का खाना जुटा पाते थे ! इसके अलावा बच्चों की जरूरतों को पूरा करने में कभी -कभी वह खुद को असमर्थ पाते थे ! राजू बहुत ही समझदार व पढने में होशियार था ! अपने ही गाँव के विधालय में वह हर साल प्रथम आता ! उसी विधालय में कुछ बहुत ही अमीर घरों के बच्चे भी पदते थे ! पढाई में नालायक होने के कारण वे रोज अध्यापकों की डांट खाते ! वे सब राजू से बहुत चिढ़ते थे ! कभी उसके कपडों तो कभी गरीबी का मजाक बनाते ! राजू कभी ये बात अपने माता -पिता सा नहीं कहता था ! विधालय से आने के बाद अपने पिताजी के साथ काम में पूरी मदद करता ताकि उनकी कुछ मदद हो सके ! अब उसके छोटे भाई - बहन ने भी पढना शुरू कर दिया था ! राजू की आठवी की परीक्षा ख़त्म हो गयी थी ! उसे अब अपना आगे पढना नामुमकिन सा नजर आ रहा था क्योंकि इसके लिए शहर जाना पड़ता था ! उसके गरीब माँ -बाप के पास इतना पैसा नहीं था की उसे बहर भेज सके ! इस बार जब नतीजा आया तो राजू पुरे जिले की परीक्षा में मेरीट लेकर आया ! राजू की ख़ुशी का ठिकाना नहीं था ! उसे सरकार की तरफ से आगे पढने के लिए वजीफा मिल गया ! उसके अध्यापकों ने भी राजू के माता - पिता को बहुत समझाया की आपका बच्चा बहुत लायक है और ये एक सुनहरी मौका इसे ऐसे जाने मत दीजिये ! राजू के माता - पिता मान गए ! अब वह रोज पढने के लिए शहर जाने लगा ! रोज पैदल आने - जाने के बावजूद व पिता के काम में उनकी मदद करता ! वंहा भी वे अमीर बच्चे उसे तंग करते ! धीरे - धीरे वह उनकी संगत में आने लगा ! घर से झूठा बहाना बनाकर कापी - किताबों के बहाने पैसा मांगने लगा ! उसके माता - पिता भी इस कारण परेशान रहने लगे !शरुआत में तो उन्होंने कुछ नहीं कहा पर अब उनका बोझ बदने लग गया था ! राजू न वंहा कक्षाएं लगाता और न घर आकार कोई काम करता ! शहर में उन लड़कों के साथ घूमता फिरता रहता ! एक दिन शाम को जब वह घर आया तो देखा की उसकी बहन रो रही थी ! घर पर खाना भी नहीं बना था ! उसने माँ से पूछा तो उन्होंने भी कोई जवाब नहीं दिया ! वह और घबरा गया ! तभी उसकी नजर जा रहे डॉक्टर साहब पर पढ़ी ! वह भाग कर उनके पास गया की क्या हुआ तब उन्होंने बताया की वे आज अपना खून बेच कर आये हैं ! पहले ही कमजोर होने के कारण उनकी तबियत खराब हो गयी ! वे नहीं चाहते थे की तुम्हारी पढाई में कोई रुकावट आये ! उसकी आँखों से आंसू बहने लगे ! अपने किये पर उसे आज बहुत पछतावा हो रहा था ! वह जाकर अपने पिता के पांवों में गिर गया और उन्हें सब कुछ सच बता दिया ! अपनी गलती पर वह बहुत शर्मिंदा था ! दसवीं की परीक्षा में उसने बहुत मेहनत की और फिर जिले में नाम रोशन किया ! अब वह और लगन से पढने लगा व साथ ही बच्चों को भी पढ़ने लगा ! उसकी एक गलती ने उसे जीवन का सबसे बडा सबक सिखा दिया था !

2 comments:

  1. galtiyon se sabak lekar jo khud ko badal le usse badi koi baat nhi........ek bahut hi achcha sandesh deti kahaani.......badhayi

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