Friday, March 26, 2010

आशाओं के संग

निरंतर चल रहा है ये कारवां, गतिमान, उत्साहित आँखों में अरमान लिए,
जिन्दगी में कुछ हासिल करने,  स्वप्न सलोनों को पूरा करने,
अपनी ही उमंगों में चलता,  मुश्किलों को चुनौती समझ उनसे जूझता,
जैसे आगे बढ़ने की होड़ में नदियों या लहरों का टकराना, उनका छिन्न-भिन्न होना,
लेकिन फिर उसी उत्साह से आगे बढ़ना, पतझड़ में फूलों का एक-एक गिरता पत्ता,
लेकिन बसंत में खिलने वाली नई कोपलों की आस लिए,
यही जीवन के हैं रंग, आशा और निराशा संग -संग ,
अंत मुश्किलों का कर सामना, सपनों को न मरने दें,
भरता जा उनमें नित नए रंग, खुशियों व नई आशाओं के संग,
आशाओं के संग ...........

4 comments:

  1. बहुत सुन्दर!!

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  2. आपके लेखन ने इसे जानदार और शानदार बना दिया है....

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  3. अति सुंदर, अविराम लिखें, सुबहोशाम लिखें

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  4. nice one vindra ! keep it up ! dear !
    and plz improve day by day!

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