Sunday, December 27, 2009

बदलते रूप

रमेश फिर बहुत शराब पीकर आया था ! इसका कारण वही पुराना था ! दोस्तों के घर पार्टी थी या सहयोगियों व अफसरों के साथ मेलजोल बढाने का सबसे सरल उपाय ! घर आते ही कलेश शुरू हो गया ! वह किसी को कुछ नहीं कहता था ! परन्तु उसकी ये हालत परिवार वालों से देखी न जाती ! बूढ़े माँ -बाप उसे कोस रहे थे की उम्र का कुछ ख्याल कर ! इतनी शराब पीकर वाहन चलाने का भय हमें खाता रहता है ! बच्चे कसमे दे रहे थे की आप आगे से कभी शराब को हाथ नहीं लगायेंगे !पत्नी रो -रोकर सबको चुप करा रही थी ! काफी हो - हल्ला करने के बाद सब सो गए ! उस दिन के बाद पत्नी को छोड़ बाकि परिवार वालों ने उससे बात करनी बंद कर दी !
कुछ दिन बाद उसे बिजनेस में बहुत बड़ा फायदा हुआ ! घर में जशन का माहौल था ! माँ -बाप रमेश की बलाएं लेते नहीं थक रहे थे ! बच्चे घुमने का प्रोग्राम बना रहे थे ! घर में खुले आम शराब चल रही थी पर किसी के मुख पर कोई शिकन का भाव नहीं था !
पत्नी कोने में खड़ी सबके बदलते रूप का तमाशा देख रही थी !

4 comments:

  1. अच्छा आबजर्वेशन है..बढ़िया लगा पढ़कर.

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  2. इसे कहते है..रंग बदलना ,घर में पैसा आता है तो कोई ये नहीं पूछता की कहाँ से आ रहा है?

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  3. APKE BLOG PAR AAKER BAHUT HI ACHA LAGA VRINDA JI

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